कविता - मेहनत किसान की


आखिर हम कैसे भूल गये, मेहनत किसान की, दिन हो या रात उसने, परिश्रम तमाम की। जाड़े की मौसम वो, ठंड से लड़े, तब जाके भरते, देश में फसल के घड़े। पूरी कविता पढ़ने के लिए
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